साहित्य

मान्छेको मन

काँच भन्दा कमजोर फूलभन्दा सुन्दर घामभन्दा घमाइलो एउटै त रहेछ यहाँ मान्छेको मन !!! यहाँ स्पर्श बेगरै मान्छेको मन काँचजस्तै…